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क्या खोया है क्या पाया है
यह सोच के क्या हासिल आया है
जो खोया है वह भी पाया था
जो पाया है वह शायद खो देंगे
जप पाया था वह प्यारा था
जब खो दिया तोह क्यों खटकने लगा
बीते हुए केवल अच्छे पालो की
यादे संजोना क्यों नही आया है
क्या खोया है क्या पाया है
यह सोच के क्या हासिल आया है
जो है नही उसको याद कर के
हमने क्यों अपना जीवन दुखी बनाया है
जो है उसका एहसान न मान कर
उसकी भी कीमत को घटाया है
क्या खोया है क्या पाया है
यह सोच के क्या हासिल आया है
हमे अपने कल को भुला क्र
आज में जीना क्यों नही आया है
कडवे पलो को भुला के
आज को अपनाना क्यों नही आया है
क्या खोया है क्या पाया है
यह सोच के क्या हासिल आया है
आज को देखो आज में जियो
क्योंकि आज ही कल को बनता है
क्या खोया है क्या पाया है
यह सोच के क्या हासिल आया है

0 thoughts on “क्या खोया है क्या पाया है”

Prajakta · August 28, 2016 at 4:01 pm

Thanks Beejai for liking my post 😊

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