The World of Books
(Last Updated On: October 6, 2016)

I had written this poem a few months back for my mother in law (who is a Principal in a Government College), on behalf of my husband and me.

In Maharashtra we usually celebrate the 61st, 71st and 81st birthdays of our elders with a pooja followed by a get-together of family and friends.

There were two occasions. My mother in law had already completed 60 years of her life and was in the 61st year. And recently she had gone to Sri Lanka representing India in a Sociology Conference and won a Gold Medal there. So there was a double celebration.

The poem goes like this…

बचपन में जो थी शैतान ,
अब बच्चों को देती ज्ञान ,
छुटपन में चुलबुल करने वाली ,
अब बन गयी है बड़ी सायानी ,
जो ज़ुबाँ बयां ना कर पायी ,
ऐसी है हमारी प्यारी आई।

सारे भाई बहनों की लाड़ली बहना,
गाती जो कोकिला जैसा गाना ,
एक आदर्श बहन , बेटी , पत्नी और माता,
हर कार्य में दिखती कुशलता ,
हर कार्य को उत्साह से करने वाली ,
ऐसी है हमारी प्यारी आई।

राजिमवाले परिवार की दुलारी ,
पेंढारकर परिवार की आधार स्तम्भ ,
हमारी मार्गदर्शक और प्रेरणा स्त्रोत ,
ममता करुणा से ओतप्रोत ,
महालक्ष्मी स्वरुप में हम पर सदा कृपा रखने वाली ,
ऐसी है हमारी प्यारी आई ।

नई चीज़ों के प्रति उत्सुकता रखने वाली ,
नयी राहों पर हिम्मत से चलने वाली ,
अपने डर पर काबू करने वाली ,
गिरकर, फिर उठकर बढ़ने वाली ,
सदा दीप सी जलने वाली ,
सबको प्रकाश देने वाली ,
ऐसी है हमारी प्यारी आई ।

खुद पर विश्वास रखने वाली ,
अपनी क्षमताओं को आज़माने वाली ,
अगाध परिश्रम करने वाली ,
लंका में स्वर्ण पदक जीतने वाली ,
पूरे विश्व के सामने भारत का डंका बजने वाली ,
ऐसी है हमारी प्यारी आई ।

इसका ह्रदय है बड़ा विशाल ,
रखती है यह सबका ख्याल ,
प्रकृति से करती बेहद प्यार ,
चिड़िया के बच्चे सी निश्छल ,
भरे गुलाब सी खिलने वाली ,
ऐसी है हमारी प्यारी आई ।

This poem is very close to my heart and I just thought of sharing it with you all.. My wordpress family 🙂


0 thoughts on “हमारी प्यारी आई (Our Dear Mother)”

Sudhir Chauhan · October 5, 2016 at 11:57 am

nice to see you writing in Hindi…….. lovely….

thoughtsnlifeblog · October 6, 2016 at 7:03 am

I cant read hindi will ask my mum to read

Prajakta · October 6, 2016 at 8:35 am

Sure 😊👍

thoughtsnlifeblog · October 6, 2016 at 9:11 am

Beautiful… mum just read it…

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